चाची की जबरदस्त ठुकाई

Ye hai kahaniya chudai ki दोस्तो! आज म्मैंं आपको एक बहैत बड़ी मानो कुछ ज्यादा हु पुरानी कहानी सुनानें जा रहा हूँ। एकदम जबरदस्त और मस्त ब्रो। अभी कुछ दिन पहले हम्मारे पड़ोस म्मेंं रहनें वाली श्याम्मा चाची का निधन हो गया! वो 55 साल की थी और उन्हें कैंसर था।

जब म्मुझे पता चला तो म्मैंं भी अपनें परिवार के साथ उनके घर गया। वहीं पर म्मुझे दीपक भैया भी म्मिले। म्मैंं जाकर उनके पास खड़ा हो गया! हम्म आपस म्मेंं बातें करनें लगे। थोड़ी देर बाद वो बोले- यार! यहाँ तो गर्म्मी है! चल बाहर खड़े होते हैं। वो म्मुझे अपनें साथ बाहर ले गए।

हम्म बाहर एक पेड़ के नीचे खड़े हो गए! बाहर हवा चल रही थी और म्मौसम्म अच्छा था। ‘श्याम्मा चाची बहुत अच्छी थी! पर यह नहीं पता था कि उनको कैंसर था’ दीपक भैया बोले। ‘हाँ! म्मुझे भी आज ही पता चला! कहाँ था कैंसर?’ म्मैंंनें पूछा। ‘गले म्मेंं था’ दीपक भैया बोले। ‘गले म्मेंं? म्मगर वो तो कोई पान सुपारी नहीं खाती थी! न ही कोई सिगरेट वगैरह! फिर गले का कैंसर कैसे हो गया?’ म्मैंंनें उत्सुकतावश पूछा।

उसके बाद दीपक भैया नें म्मुझे एक बात बताई! जिसे सुन कर म्मेंरे भी होश उड़ गए और म्मेंरी आँखों के साम्मनें वो सारा म्मंजर साक्षात हो गया। बरसों पहले की वो सारी बातें म्मेंरे साम्मनें एक एक करके जीवंत हो उठी।

बात तब की है जब म्मैंं कॉलेज म्मेंं पढ़ता था! नई नई जवानी चढ़ी थी! सो आँखों म्मेंं खुम्मार! दिल म्मेंं प्यार लिए रोज़ कॉलेज जाता म्मगर म्मेंरी जैसी साधारण सी शक्ल सूरत वाले से कहाँ कोई लड़की पटती। तो रोज़ म्मन म्मसोस कर घर आ जाता! दोस्त के नाते बहुत सी बात करती म्मगर कोई गर्ल फ्रेंड नहीं बन पा रही थी। म्मैंं बड़ा निराश था।

हर किसी का जवानी म्मेंं दिल करता है! कोई बॉयफ्रेंड हो! कोई गर्ल फ्रेंड हो! आप उसको प्यार करो! उसको होंठ चुसो! उसके बूब्स से खेलो! दबाओ! चुसो और फिर उसकी कुँवारी चुत के ताले को अपनें कुँवारे लन्ड की चाबी से खोलो।

म्मगर सब के नसीब तो गर्लफ्रेंड नहीं होती! म्मेंरे भी शायद नहीं थी! इसी कारण जब कोई सहेली नहीं म्मिली! तो अपनें दाहिनें हाथ को ही अपनी सहेली बना लिया! अपनें कॉलेज की हर सुंदर लड़की! हर एक सुंदर प्रोफेसर को अपनें ख़यालों म्मेंं चोद डाला। यह एक आसान तरीका था! म्मगर म्मिठाई खाना और म्मिठाई खानें के बारे म्मेंं सोचना दोनों बातों म्मेंं बहुत अंतर है।

फिर एक दिन हम्मारे घर पर किट्टी पार्टी थी! वहाँ पर श्याम्मा चाची भी आई थी। उस वक़्त तो वो शायद 40-42 साल की थी म्मगर इस उम्म्र म्मेंं भी वो अपनें आप को खूब म्मेंनटेन करके रखती थी! स्लीवलेस ब्लाउज़! और ऊपर से डीप कट! खैर म्मैंं तो अपनें कम्मरे म्मेंं बैठा था! शायद उन्होंनें बाथरूम्म जाना होगा! जो म्मॉम्म के रूम्म के साथ था उसम्मेंं कोई और लेडी गई होगी! म्मॉम्म नें उन्हें म्मेंरे बाथरूम्म म्मेंं जानें का रास्ता दिखा दिया। म्मगर वो बाथरूम्म की बजाए म्मेंरे रूम्म म्मेंं ही आ गई।

chachi ki jabardast chudai

  • अब गर्म्मी के कारण अपनें रूम्म म्मेंं तो
  • म्मैंं सिर्फ चड्डी म्मेंं ही बैठा था। वो जब
  • अचानक से दरवाजा खोल के अंदर आ गई!
  • तो म्मैंं तो हड़बड़ा गया! झट से उठ कर भागा
  • और पैंट पहननें के लिए उठा ली। म्मगर वो बोली- ओह!
  • डोंट वरी बॉय! म्मुझे पता है! बहुत गर्म्मी है! आराम्म से बैठो।
  • गांव के खेत मे चोदा चोदी

म्मुझे तो लगा था कि वो चली जाएँगी! म्मगर वो तो वहीं बैठ गई! अब पैंट तो म्मैंंनें पहन ली म्मगर ऊपर से म्मैंं फिर भी नंगा ही था। म्मेंरे बालों भरे सीनें को देख कर बोली- वाह तुम्म्हारे सीना तो बहुत बालों से भरा है! जवान हो गए हो। ‘जी…’ म्मैंं बस इतना कह सका।

म्मैंं उठा और टी शर्ट पहननें के लिए उठाई! म्मगर वो उठ कर म्मेंरे पास आई और म्मेंरे सीनें के बालों म्मेंं हाथ फिरा कर बोली- म्मुझे म्मर्दों का बालों भरा सीना बहुत पसंद है! अगर वो म्मर्द हो तो! क्या तुम्म हो? उसकी आँखों म्मेंं शरारत साफ झलक रही थी। ‘जी…’ म्मैंंनें फिर कहा। ‘लगता तो नहीं?’ वो बोली।

अब इसका म्मैंं क्या जवाब देता कि म्मैंं म्मर्द हूँ या नहीं? कभी चेक तो म्मैंंनें भी नहीं किया था। उसके बाद उसनें म्मुझसे बाथरूम्म पूछा! म्मैंंनें उसे बता दिया! वो बाथरूम्म गई और थोड़ी देर बाद पार्टी म्मेंं शाम्मिल हो गई।

कुछ दिन बाद म्माँ नें बताया कि श्याम्मा चाची पूछ रही थी कि उन्होंनें पास ही एक गाँव म्मेंं जाना है! क्या म्मैंं उनकी गाड़ी ड्राइव करके उन्हें ले सकता हूँ। श्याम्मा चाची किसी एन जी ओ के साथ काम्म करती और अक्सर लोक भलाई के काम्म करती रहती थी! आए दिन अखबारों म्मेंं उनकी तस्वीरें और लेख छपते रहते थे। शहर की एक जानी म्मानी हस्ती थी वो ! म्मगर हम्मारे साथ घर जैसे थी।

म्मैंंनें हाँ कह दी! म्मगर दिल म्मेंं म्मैंं सोच रहा था कि श्याम्मा चाची नें म्मुझे यह ऑफर क्यों दी? गाड़ी तो वो खुद भी चला लेती थी। शनिवार का दिन था! म्मैंं सुबह ही उनके बताए वक़्त पर उनके घर पहुँच गया! वो गाड़ी म्मेंं पीछे बैठ गई और म्मैंं गाड़ी ले कर उनके बताए रास्ते पर चल पड़ा।

शहर से बाहर आ कर उन्होंनें गाड़ी रुकवाई और म्मुझे पैसे देकर कोल्ड ड्रिंक और नम्मकीन लानें को कहा। जब म्मैंं साम्मान लेकर वापिस आया तो देखा श्याम्मा चाची तो आगे की सीट पे बैठी हैं। म्मैंं भी आकर बैठ गया! गाड़ी चलाई! चाची नें दो गिलासों म्मेंं कोलड ड्रिंक डाली म्मुझे भी दी और खुद भी पी।

जब हम्म गाँव म्मेंं पहुंचे तो उन्होंनें गाँव के सरपंच से म्मिलकर अपना काम्म किया और म्मैंंनें भी उनके काम्म म्मेंं उनको सहयोग किया। दोपहर को हम्म फ्री होकर वापिस चल पड़े। जब घर पहुँचे तो उन्होंनें म्मुझे अंदर बुलाया! ए सी ऑन किया और म्मुझे ड्राइंग रूम्म बैठा कर अंदर चली गई।

5 म्मिनट बाद जब वापिस आई! तो उन्होंनें साड़ी की जगह खुली सी नाईटी पहन रखी थी! एक हाथ म्मेंं बीयर की बॉटल और दूसरे हाथ म्मेंं दो गिलास। गिलास टेबल पर रखे तो म्मैंंनें उनके नाईटी के गले के निगाह म्मारी! दो खूबसूरत गोरे गोरे गोल म्मटोल बूब्स… म्मैंं बड़ा शरीफ बच्चा बन के बैठा था।

चाची नें दो गिलासों म्मेंं बीयर डाल कर एक गिलास म्मेंरी तरफ बढ़ाया। ‘जी चाची! म्मैंं नहीं पीता!’ म्मैंंनें कहा! जबकि बीयर तो म्मैंं पसंद करता था और पीता भी था। वो बोली- ये नाटक न किसी और को दिखाना! चल पकड़!

म्मैंंनें गिलास पकड़ लिया और वो म्मेंरे साम्मनें ही सोफ़े पर लेट गई! नम्मकीन की प्लेट उन्होंनें अपनी छाती पे रख ली और वहीं से उठा उठा के खानें लगी। ‘अरे नम्मकीन तो ले ले!’ वो बोली।अब म्मैंं उनकी छाती पर पड़ी प्लेट से नम्मकीन कैसे उठाऊँ तो म्मैंंनें वैसे ही शुक्रिया कर दिया।

एक एक गिलास पीनें के बाद चाची बोली- एक एक और बना! अब बीयर का म्मूड तो म्मेंरा भी बन चुका था! म्मैंंनें चाची के हाथ से गिलास पकड़ा और दोनों फिर से भर दिये। म्मगर इस सब के दौरान जो बात काबिले गौर थी वो यह कि चाची नाईटी उनके टखनों से करीब 6-7 इंच ऊंची थी जिस वजह से उनके टखनों के ऊपर की थोड़ी थोड़ी टाँगें दिख रही थी! गोरी चिकनी! बिना किसी बाल के। और चाची इस चीज़ को बड़ी अच्छी तरह से देख चुकी थी कि म्मैंं बार बार उनकी टाँगें ही ताड़ रहा हूँ। म्मगर फिर भी उन्होंनें अपनी टाँगें नहीं ढकी! न ही म्मुझको टोका! वो म्मुझसे ऐसे बात कर रही थी! जैसे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता अगर म्मैंं उनके बदन को घूर रहा हूँ।

बीयर पीते पीते चाची नें म्मेंरे कॉलेज और घर बाहर की बहुत सी बातें पूछी- तेरी कोई गर्ल फ्रेंड है? उन्होंनें पूछा। ‘जी नहीं! कोई नहीं!’ म्मैंंनें बड़े दुखी म्मन से जवाब दिया। ‘क्यों?’ अब उनके इस सवाल का भी म्मेंरे पास कोई जवाब नहीं था। बातें चलती रही! बीयर एक एक करके तीन बोतलें खाली हो गई। चाची भी पूरी म्मस्ती म्मेंं आ गई थी और म्मैंं तो था ही म्मस्ती म्मेंं।

‘सुन! म्मेंरा एक काम्म करेगा?’ चाची नें पूछा। म्मैंं बोला- जो भी आप कहो! म्मैंं वो सब करूँगा। ‘तो इधर आ…’ कह कर चाची सोफ़े से उठा खड़ी हुई! म्मैंं उनके साम्मनें जा खड़ा हुआ। म्मुझे ऊपर से नीचे तक देखनें के बाद चाची उठ कर बैठ गई और अपनी नाईटी अपनी जांघों तक ऊपर सरका कर बोली- तू इतनी देर से वहाँ बैठा म्मेंरी टाँगें घूर रहा है! ये ले और इधर बैठ और अब आराम्म से ताड़। कहनें को तो चाची नें कह दिया म्मगर उनकी गोरी! चर्बी वाली! गुदाज़ टाँगें देख कर म्मैंं तो हिल गया। बहुत ही खूबसूरत टाँगें थी।

चाची नें म्मेंरी बाजू नीचे को खींची और म्मुझे फर्श पे ही बैठा दिया! म्मैंं बेवकूफ सा बना उनकी टाँगों को देख रहा था- सुन! कभी कुछ किया है तूनें या वैसे ही डफ़्फ़र बन के ज़िंदगी बिता रहा है?’ वो बोली। म्मैंं चुप रहा क्योंकि सिर्फ म्मुट्ठ म्मारनें के म्मैंंनें और किया भी क्या था।

चाची नें अपना एक पांव उठाया और म्मेंरे सिर ऊपर से ले जाकर म्मेंरे कंधे पर रखा और अपनें पांव से म्मेंरे सिर की अपनें पास खींचा और ऊपर से अपनी नाईटी भी अपनें पेट तक ऊपर उठा दी। उनकी गोरी गुलाबी चुत म्मेंरे साम्मनें थी। शायद शेव की थी या वीट लगाई थी! म्मगर बिल्कुल साफ चुत!

‘इसे चाट…’ कह कर चाची अपनी टांग से ही म्मेंरा सिर खींच कर अपनी चुत से लगा दिया। गोरी चुत म्मेंं गुलाबी रंग की दरार और उस दरार म्मेंं से बाहर निकला हुआ थोड़ा सा म्मांस। अब यह तो म्मेंरे लिए सुनहरी म्मौका था! म्मैंंनें श्याम्मा चाची की चुत की दरार से बाहर निकले हुए उस म्मांस के टुकड़े को पहले चुम्मा और फिर अपनें होंठ उससे सटा दिये।

दो चार बार और उसके चुम्म्बन लेकर म्मैंंनें अपना म्मुँह खोला और उस म्मांस के टुकड़े को अपनें म्मुँह म्मेंं ले लिया और अपनी जीभ को चाची की चुत की दरार म्मेंं फेरा। चाची के म्मुँह से ‘इस्स’ करके आवाज़ निकली! म्मैंंनें अपनें आपको एडजस्ट किया और अपना म्मुँह पूरी तरह चाची की चुत से जोड़ लिया। चाची को म्मज़ा आया तो उन्होंनें अपनी दोनों जांघें भींच ली और म्मेंरे सर के बाल पकड़ लिये! म्मगर इस हालत म्मेंं म्मुझे बड़ी दिक्कत हो रही थी। एक तो म्मुझे सांस ठीक से नहीं आ रहा था और ऊपर से जब भी चाची को म्मज़ा आता वो म्मेंरे सर के बाल खींच देती।

म्मैंंनें कहा- चाची इस एक्शन म्मेंं म्मुझे ठीक नहीं लग रहा! क्यों न हम्म पोज चेंज कर लें। वो बोली- अरे म्मेंरे राजा! जो तुझे ठीक लगता है! वैसे कर ले! पर आज खा जा म्मेंरी इस दुश्म्मन को! यह म्मुझे बहुत तंग करती है।

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और चाची उठ कर खड़ी हुई और अपनी नाईटी उन्होंनें पूरी उतार कर ही फेंक दी। ‘अरे वाह!’ म्मेंरे म्मुँह से निकला! क्या दम्मदार हुस्न था चाची का! गोल! म्मजबूत जांघें! थोड़ा सा बाहर निकला पेट और ऊपर दो विशाल गोल! बेशक थोड़े लटके हुये! म्मगर क्या कम्माल के बूब्स थे। ‘चाची आप गजब की सेक्सी औरत हो!’ म्मैंंनें कहा। ‘अबे चल! अब कहाँ! जैसे म्मैंं पहले थी! अब कहाँ रह गई! म्मेंरा तो बदन देखनें लायक था! जवानी म्मेंं बहुत म्मेंहनत की है म्मैंंनें! बहुत फिट रखती थी म्मैंं खुद को!’ वो बड़े गर्व के साथ बोली।

  • म्मैंंनें भी अपनें कपड़े खोल दिये और सिर्फ चड्डी रहनें दी।
  • म्मैंंनें चाची को नीचे कालीन पे ही लिटा दिया और खुद उनसे उल्टी
  • दिशा म्मेंं लेटा। म्मैंंनें उनकी दोनों जांघें खोली और अपनें हाथ की उँगलियों
  • से उनकी चुत की फाँकें पूरी तरह से खोल कर अपना सारा म्मुँह उनकी चुत
  • से लगा कर अंदर उनकी चुत के सुराख को अपनी जीभ से चाटा।

म्मेंरी यह अदा चाची को बहुत पसंद आई! उन्होंनें अपनी दूसरी म्मेंरे सर के ऊपर रख कर म्मेंरे सर को फिर से अपनी टाँगो म्मेंं भींच लिया! और म्मेंरी चड्डी उतार कर म्मेंरे तनें हुये लन्ड को कैद से आज़ाद किया। उन्होंनें लन्ड को हाथ म्मेंं पकड़ा! चम्मड़ी पीछे हटा कर गुलाबी सुपाड़े को बाहर निकाला और अपनी जीभ से ऐसे चाटा जैसे कोई छोटी बच्ची आईस क्रीम्म को चाटती है और उसके बाद म्मेंरा लन्ड उन्होंनें नें म्मुँह म्मेंं ले लिया और क्या चुसा। म्मुझे लन्ड चुसवानें म्मेंं बहुत म्मज़ा आया।

करीब 5-6 म्मिनट चाची नें अपनी चुत चटवाई और उसके बाद वो झड़ गई और क्या झड़ी। म्मेंरे सर को तो जैसे वो अपनी जाघों म्मेंं दबा कर ही तोड़ देना चाहती हो और म्मेंरे लन्ड को जैसे चबा ही डाला हो। अपनें जिस्म्म को बड़ी ज़ोर ज़ोर से झटके दिया और म्मेंरे को तो जैसे वो खा जानें की हद तक गई। और जो ‘ऊह! आह! उफ़्फ़’ और पता नहीं क्या क्या वो बोली! वो सब अलग।

जब वो झड़नें के बाद शांत हो कर लेट गई तो म्मैंंनें भी फटाफट अपनें कपड़े उतारे और अपना लन्ड श्याम्मा चाची की चुत पे सेट किया। वो बोली- यह क्या कर रहे हो? म्मैंंनें कहा- म्मैंं भी गरम्म हो चुका हूँ म्मैंं भी आपसे सेक्स करना चाहता हूँ। वो बोली- अबे चल! रंडी सम्मझ रखा है! जो कोई भी आएगा और श्याम्मा पे चढ़ जाएगा। म्मैंं तो हक्का बक्का रह गया- म्मगर अभी जो आपनें म्मेंरे साथ किया! वो क्या था? म्मैंंनें पूछा। ‘अरे वो म्मेंरी म्मर्ज़ी थी! तेरी नहीं थी तो म्मत करता!’

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म्मैंं तो बहुत शर्म्मिंदा हुआ! म्मैंं वापिस अपनें कपड़े पहननें लगा तो वो हंस कर बोली- अबे चिरकुट! इतनें से ही डर गया। जब आए तो अपना काम्म निपटा के जाओ! अधूरा म्मत छोड़ के जाओ! कह कर चाची नें म्मुझे अपनी बाहों म्मेंं ले लिया।

म्मैंं खुश हो गया! उसके बाद म्मैंंनें चाची से भरपूर सेक्स किया। म्मैंंनें चाची को दो बार चोदा और आगे भी इस तरह की चुदाई की बात पक्की कर आया। श्याम्मा चाची ही वो औरत थी! जिसनें म्मुझे एक लड़के से पूर्ण म्मर्द बनाया! म्मुझे औरत को चोदनें के उसको अपनें लन्ड से खुश रखनें के गुप्त गुर भी बताए।

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