पराये मर्द का मज़ा

उस दिन जल्दी जल्दी में हम मजे से नहीं चुदाई कर सके। मैंने उसको रात को १२ बजे अपने कमरे की खिड़की पर आने को कहा।
वो बोला- सुहागरात मनानी है क्या छोटी दुल्हन?
मैंने कहा- तैयार रहना ! जो जी में आये समझ लो ! मुझे तेरा लौड़ा फिर लेना है !
ठीक बारह बजे मेरा इशारा पाकर वो खिड़की पर आया। उसको अन्दर खींच मैंने खिड़की बंद करते हुए पर्दा आगे किया। बाहर बहुत गर्मी थी, ए.सी में आकर उसको सकून सा मिला। उसे पसीना आने की वजह से मैं उसको पकड़ बाथरूम में ले गई, उसके सारे कपड़े उतार दिए, अपने भी, दोनों अलफ नंगे !
उसका लुल्ला लटक रहा था, कितना सांप जैसा !
मैंने शावर चलाया और नीचे उसके साथ लिपट कर खड़ी हो गई। पानी के बूंदें मेरे यौवन को निखार रहीं थीं। बूँद बूँद मेरे चिकने जिस्म से फिसल रही थी, वो मेरा अंग अंग सहला, चाट रहा था, मेरे मुहं से सिसकियाँ निकल रहीं थी।
मेरे आलीशान बाथरूम में, जो मैंने बहुत तबीयत से बनवाया था, वहीं फर्श पर मैं नीचे बैठ गई। पहले उसके लौड़े को सहलाया, फिर मुँह में डाल लिया। वह कितना मजा आ रहा था ! देखते ही देखते तन कर डण्डा बन गया। उसका पूरा लौड़ा मैंने मुँह में ले ले कर चूसा। उसने मुझे वहीं चित्त कर दिया, पकड़ कर नीचे लिटा मेरे ऊपर सवार हो गया।
अह ! अह !
धीरे से उसने अन्दर डाल दिया और चोदने लगा।
वाह मेरे घोड़े और चोद साले ! पक्का चोदू है ! मैं क्यूँ तड़प रही थी इतने दिन से ! अह ! अह ! और घस्से मार ! जोर जोर से ठोक ! वाह मेरे लौड़े !
पानी के नीचे चुदाई का अलग मजा मिलता है।
बोला- चल साली कुतिया बन जा !
मैं कुतिया की तरह चलती हुई टब किनारे जा रुकी, वो पीछे से आया और डाल दिया !
मेरे हाथ टब में और घुटने बाहर !
उसका मोटा लौड़ा धमाल मचाने लगा।
वाह मेरी बुलबुल ! कमाल की चीज़ है तू ! तेरी जैसे को तेरा पति कैसे ठंडी करता होगा ! क्या हुस्न मिला है ! तुझे साली जिंदगी भर चोदता रहूँगा ! अह ! आहा !
और जोर से रगड़ हरामी ! अपनी मालकिन की भोंसड़ी मार मार कर फाड़ डाल ! आज रात पड़ी है ! डर भी नहीं साले ! और तेज़ ! अह ! अह !
साली कुतिया ! नौकर से चुदा कर कैसा लग रहा है ?
हीरा है तू ! पता नहीं नज़र से कैसे बचा रहा !
ले साली ! उसने ऊँगली गांड में डाल दी और फिर दो ऊँगली करते करते उसने लगभग हाथ ही डाल देता, अगर मैं चीखती ना !
मैं गई साईं ! झड़ने वाली हूँ ! जोर से रगड़ ! हः ! अह ! हा !
कहते कहते मैं झड़ने लगी। ओह ओह ! बहुत म़जा आया कमीने ! तेरे नीचे फुर्सत में बिना टेंशन चुदवा कर निहाल हो गई !
उसने लौड़ा निकाला और रस से भीगा हुआ गीला लौड़ा मेरी गांड में घुसा दिया !
वाह मेरे कुत्ते ! वाह बहुत हरामी है तू भी ! डाल ही दिया आखिर ! वाह मेरे ठोकू !
और मेरी गाण्ड में सारा रस डाल दिया, सारी खुजली ख़त्म !
उसके बाद उसने मुझे बाँहों में भर बेड पर पटक दिया, खुद किनारे पर खड़ा होकर लौड़ा मेरे मुँह में फिर से डाल दिया। क्या मर्द था दोस्तो ! इतनी जल्दी दुबारा मेरा कोई भी आशिक शादी से पहले ऐसा न कर पाया, क्यूंकि जब कभी मेरा बॉय फ्रेंड मुझसे पहले ठुस्स हो जाता तो लाख कोशिश के बाद भी उसका जल्दी खड़ा नहीं होता।
लेकिन देखते ही देखते उसका लण्ड सात आठ मिनट में तन कर फूंके मार रहा था। दोस्तों सारी रात, सुबह के पाँच बजे तक वो मुझे रौन्धता रहा, मैं चुदती रही !
उसके बाद २० दिन के लिए हॉस्टल से मेरी ननद घर आई वो मेरे साथ सोती। मेरा और मेरे सीरी बुरा हाल था। उसकी चुदाई के बिना मैं तड़प रही थी।
एक दिन उसने मुझे कहा- खेतों में ट्यूबवेल पर दोपहर में मुझे मिलने आ जाना !
खेत घर से ४ किलोमीटर दूर था, जब हम दोनों खेतों में पीपल के दरखत की ठंडी छाया में एक दूसरे में समाये हुए थे तो मेरे जेठ ने हम दोनों को रंगे-हाथ पकड़ लिया। मैं जल्दी से कमरे में घुस गई, कपड़े पहने और वहाँ से निकल आई।
जेठ जी भी मुझे प्यासी नज़रों से देख मुस्कुरा दिए।
मैं थोड़ा शरमाने का नाटक कर चली आई।
उसके बाद क्या हुआ?
यह आपके प्यारे जवाबों के बाद !
कि किस तरह मैंने जेठजी का मुँह बंद किया !!

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